Saturday, 28 November 2020
गड़ासरू महादेव
3:40 बजे प्रातः तारीख 12/08/ 2020 का वो वक्त था जब एक जिंदगी से परेशान आत्मा सामसमयिक विषय के सिलसिले में यू ट्यूब पर वीडियो देख रही थी । अचानक एक ऊलजलूल सोच उसके मन में आयी कि एक कहानी लिखी जाए। जिसका नाम पहले से ही उसके शैतानी दिमाग में दस्तक दे चुका था। नाम था,"गड़ासरु महादेव हिमालय के बीच की कहानी। वो इंसान कोई और नहीं बल्कि मैं खुद था। बस फिर क्या था कहानी की तलाश थी और मुझे उस कहानी के लिए देश दुनिया से दूर पहाड़ों की सैर करने निकलना था। किस्मत ने भी साथ दिया पता चला गड़ासरू महादेव की यात्रा होने जा रही है। पवन जो की मेरे रिश्ते में चाचा लगते हैं। परंतु उम्र में भिन्नता कम होने की वजह से चाचा कम दोस्त ज्यादा लगते हैं। मैं उनकी करियाने की दुकान पर बैठकर उनसे इस बारे में बात कर रहा था कि तभी पंडित जी जो कि मेरे नाम राशि भी हैं वहां आ गए। हम दोनों ने उनसे राधा अष्टमी की तारीख के बारे में पूछा । तो उन्होंने बताया कि 26 अगस्त को राधा अष्टमी है और कुछ लोग इस बार 25 अगस्त को भी पवित्र स्नान करके वापिस आएंगे। क्योंकि पवित्र स्नान करने का समय दिनांक 25/8/20 दिन के 12 बजे से लेकर दिनांक 26/8/20 दिन के 12 बजे तक है।
मैंने हनी को मेरी तस्वीर खींचने को कहा जब मैं शंख बजा रहा था और हनी ने वैसा ही किया। डडवाल ने बीड़ी विवेक को पास की और वहां आध्वारी में छोटे बच्चों की फोटो खींचने में व्यस्त हो गया। उसी बीच विवेक ने बीड़ी निहाल को पास की। निहाल ने एक कश मारा और चिल्लाया "शंभू शंकर"। वो मुझे बीड़ी पास करना चाहता था। मैंने उसे मना किया क्यूंकि मैं इसका आदि नहीं हूं। उन्होंने जबरदस्ती मुझे पिलाया कि भोले के दरबार जा रहे हैं ये तो चलेगा। निहाल ने कहा तुम ऐसी जगह जा रहे हो जहां बाकी कोई मदद करे या ना करे भांग जरूर करेगी। मैंने डरी हुई दुल्हन की तरह बीड़ी को हाथ में लिया और एक कश के बाद विवेक को पास कर दी । थोड़ी देर बाद मैं सातवें आसमान पर था। मैंने कहा अब हमें चलना चाहिए। सबकी यही राय थी। मैंने जयकारा लगाया :
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